हरियाली तीज 2026: तिथि, महत्व और व्रत विधि

हरियाली तीज 2026 का पारंपरिक उत्सव, महिलाओं के झूले, हरी पत्तियाँ और मानसून की बारिश

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हरियाली तीज 2026 श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाएगी। यह पर्व विवाहित महिलाएं अपने सुहाग की दीर्घायु के लिए मां पार्वती और भगवान शिव की आराधना करते हुए मनाती हैं। मानसून की हरियाली के बीच आने वाला यह त्योहार प्रकृति के सौंदर्य और वैवाहिक सुख का प्रतीक है।

हरियाली तीज 2026 की तिथि और मुहूर्त

हरियाली तीज का पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और मां पार्वती की पूजा करती हैं। यह पर्व सावन की हरियाली के बीच आता है जब प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में होती है।

इस दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। हरे रंग के वस्त्र विशेष शुभ माने जाते हैं क्योंकि यह हरियाली और समृद्धि का प्रतीक है।

हरियाली तीज का धार्मिक महत्व

मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। परंपरा के अनुसार श्रावण मास की तीज के दिन ही उनकी यह तपस्या सफल हुई और भगवान शिव ने उन्हें अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसलिए यह दिन सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।

विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस व्रत को करती हैं। कुंवारी कन्याएं भी मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।

हरियाली तीज 2026 की व्रत विधि

हरियाली तीज का व्रत निर्जला होता है अर्थात इसमें जल भी ग्रहण नहीं किया जाता। व्रत की विधि इस प्रकार है:

व्रत की तैयारी: एक दिन पूर्व सात्विक भोजन करें और व्रत के संकल्प के साथ अगले दिन की तैयारी करें।

प्रातःकाल की क्रियाएं: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। हरे या लाल रंग के वस्त्र धारण करें। मेहंदी लगाना शुभ माना जाता है।

पूजा सामग्री: मां पार्वती और भगवान शिव की मूर्ति या चित्र, चंदन, रोली, अक्षत, फूल, दूर्वा, बेलपत्र, फल, मिठाई और दीपक की आवश्यकता होती है।

पूजा विधि: सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें। फिर मां पार्वती और भगवान शिव को जल, फूल, बेलपत्र अर्पित करें। सोलह श्रृंगार की सामग्री मां पार्वती को अर्पित करना विशेष फलदायी होता है। व्रत कथा सुनें या पढ़ें।

चंद्र दर्शन: रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। अर्घ्य देते समय मां पार्वती और भगवान शिव का स्मरण करें।

हरियाली तीज की परंपराएं और रीति-रिवाज

हरियाली तीज 2026 पर महिलाएं विभिन्न परंपराओं का पालन करती हैं। झूला झूलना इस पर्व की प्रमुख परंपरा है। घरों और मंदिरों में वृक्षों की शाखाओं पर सजे झूलों पर महिलाएं झूलते हुए मंगल गीत गाती हैं।

मेहंदी रचाना भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गहरे रंग की मेहंदी को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं अपने हाथों और पैरों पर सुंदर मेहंदी रचाती हैं।

श्रृंगार और हरे वस्त्र धारण करना इस दिन की विशेषता है। चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री का विशेष महत्व होता है। कई स्थानों पर सामूहिक पूजन और मेलों का आयोजन भी होता है।

हरियाली तीज की व्रत कथा

व्रत कथा के अनुसार मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 108 जन्मों तक तपस्या की। अंततः उनकी भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी स्वीकार किया। इसी प्रेम और समर्पण का प्रतीक है हरियाली तीज का पर्व।

एक अन्य कथा के अनुसार एक राजा की रानी बहुत धर्मपरायण थीं। उन्होंने तीज का व्रत पूरी श्रद्धा से किया। मां पार्वती की कृपा से उनके सभी कष्ट दूर हुए और उनका दांपत्य जीवन सुखमय हो गया। तभी से यह व्रत महिलाओं में अत्यंत लोकप्रिय हो गया।

हरियाली तीज पर विशेष सावधानियां

व्रत के दिन सात्विक विचार और व्यवहार रखना आवश्यक है। क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मक भावनाओं से दूर रहें।

निर्जला व्रत कठिन होता है इसलिए स्वास्थ्य का ध्यान रखें। यदि किसी को स्वास्थ्य समस्या हो तो फलाहार के साथ व्रत रख सकते हैं। व्रत में भक्ति भाव सबसे महत्वपूर्ण है।

व्रत खोलते समय सादा और हल्का भोजन करें। अचानक भारी भोजन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

हरियाली तीज 2026 का आध्यात्मिक संदेश

हरियाली तीज केवल एक त्योहार नहीं बल्कि प्रेम, समर्पण और धैर्य का पाठ है। मां पार्वती का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और धैर्य से कोई भी मनोकामना पूर्ण हो सकती है।

यह पर्व प्रकृति के साथ हमारे जुड़ाव को भी दर्शाता है। मानसून की हरियाली के बीच मनाया जाने वाला यह त्योहार जीवन में नवीनता और उमंग लाता है। यह दांपत्य जीवन में प्रेम, सम्मान और समर्पण का महत्व समझाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाली तीज 2026 कब है?
हरियाली तीज 2026 श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाएगी। यह पर्व मानसून के मध्य में आता है जब प्रकृति हरियाली से भरी होती है।

हरियाली तीज का व्रत कैसे रखा जाता है?
हरियाली तीज का व्रत निर्जला होता है जिसमें पूरे दिन अन्न और जल का त्याग किया जाता है। प्रातःकाल स्नान के बाद मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है। रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।

हरियाली तीज पर कौन से रंग के कपड़े पहनने चाहिए?
हरियाली तीज पर हरे रंग के वस्त्र विशेष शुभ माने जाते हैं क्योंकि यह हरियाली और समृद्धि का प्रतीक है। इसके अलावा लाल रंग भी पहना जा सकता है जो सुहाग का प्रतीक है।

क्या कुंवारी लड़कियां भी हरियाली तीज का व्रत रख सकती हैं?
हां, कुंवारी लड़कियां भी हरियाली तीज का व्रत रख सकती हैं। वे मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए मां पार्वती की आराधना करती हैं। यह व्रत उनके लिए भी समान रूप से फलदायी माना जाता है।

हरियाली तीज व्रत में क्या खा सकते हैं?
पारंपरिक रूप से हरियाली तीज निर्जला व्रत है जिसमें अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। लेकिन यदि स्वास्थ्य कारणों से निर्जला व्रत संभव न हो तो फलाहार किया जा सकता है। व्रत में भक्ति भाव सबसे महत्वपूर्ण है।

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