गणेश चतुर्थी 2026: 20 सितंबर को पूजा विधि

गणेश चतुर्थी 2026 तारीख पर भगवान गणेश की सजी हुई मूर्ति, फूलों की माला और जलते दीपों के साथ

गणेश चतुर्थी 2026 तारीख 20 सितंबर 2026 को पड़ रही है, जो भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। यह पर्व विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव के रूप में पूरे भारत में बड़े उत्साह और भक्ति भाव से मनाया जाता है। इस शुभ दिन से लेकर अनंत चतुर्दशी तक 11 चंद्र तिथियों में फैला यह उत्सव भक्तों के जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता लाता है।

गणेश चतुर्थी 2026 की सही तिथि और मुहूर्त

गणेश चतुर्थी 2026 तारीख 20 सितंबर 2026 शनिवार को है। इस दिन भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि का आरंभ होता है और मध्याह्न का समय भगवान गणेश की स्थापना और पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। परंपरा के अनुसार चतुर्थी तिथि के दौरान ही मूर्ति स्थापना की जानी चाहिए।

पूजा का शुभ समय मध्याह्न में रहता है जब सूर्य देव आकाश में ऊंचाई पर होते हैं। इस काल में स्थापित गणेश जी घर में सुख, समृद्धि और मंगल लाते हैं। चतुर्थी तिथि के समापन से पहले पूजा विधि पूर्ण कर लेना शास्त्रों में उत्तम बताया गया है।

गणेश चतुर्थी का महत्व और पौराणिक कथा

भगवान श्री गणेश प्रथम पूज्य देव हैं और सभी मांगलिक कार्यों में इनकी आराधना सबसे पहले की जाती है। मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न काल में भगवान गणेश का जन्म हुआ था। मां पार्वती ने अपने पुत्र को प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया था।

पौराणिक कथाओं में गणेश जी को बुद्धि, विद्या और सिद्धि के स्वामी बताया गया है। जो भक्त सच्चे मन से भगवान गणेश की आराधना करता है, उसके जीवन से सभी विघ्न दूर हो जाते हैं और कार्य में सफलता मिलती है।

गणेश जी की मूर्ति स्थापना के लिए वास्तु दिशा-निर्देश

घर या व्यवसाय स्थल पर गणेश चतुर्थी 2026 तारीख पर मूर्ति स्थापना करते समय वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करना चाहिए। इससे नौकरी और व्यवसाय में उन्नति के साथ घर में समृद्धि आती है।

स्थापना की सही दिशा: भगवान गणेश की मूर्ति घर की पूर्व या उत्तर दिशा में स्थापित करें। पूजा कक्ष में गणेश जी का मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर रखना शुभ रहता है, जिससे भक्त पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करे।

ऊंचाई का ध्यान: मूर्ति को हमेशा स्वच्छ और ऊंचे स्थान पर रखें। भूमि पर सीधे मूर्ति स्थापित करना उचित नहीं माना जाता। लकड़ी के चौकी या मंदिर में गणेश जी को विराजमान करना चाहिए।

व्यवसाय में लाभ के लिए: दुकान या कार्यालय में प्रवेश द्वार के पास उत्तर-पूर्व कोने में गणेश जी की स्थापना से व्यापार में वृद्धि होती है। यह दिशा धन और सफलता लाने वाली मानी जाती है।

घर में शांति के लिए: आवासीय भवन में पूजा कक्ष के अतिरिक्त गृह के ईशान कोण में भी लड्डू गणेश की छोटी प्रतिमा रखना मंगलकारी रहता है।

गणेश चतुर्थी की पूजा विधि

गणेश चतुर्थी 2026 तारीख के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और रंगोली बनाकर सजाएं।

मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा: सबसे पहले गणेश जी की मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से स्नान कराएं। फिर शुद्ध जल से स्नान कराकर वस्त्र अर्पित करें।

षोडशोपचार पूजन: भगवान गणेश को रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प, दूर्वा, गुड़ और मोदक का भोग लगाएं। दूर्वा की 21 या 11 पत्तियां विशेष रूप से अर्पित करना शुभ माना जाता है। धूप-दीप से आरती करें।

मंत्र जाप: पूजा के समय “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें। संभव हो तो गणेश अथर्वशीर्ष या गणेश स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत फलदायी रहता है।

आरती थाली की सजावट: आरती की थाली को आटे से विशेष रूप से सजाया जाता है। आटे से थाली के किनारे पर बॉर्डर बनाएं और बीच में दीपक रखें। फूल, रोली और चावल से थाली को सुंदर बनाएं। कुछ भक्त आटे से छोटे-छोटे दीये के आकार भी बनाते हैं और उन्हें थाली में सजाते हैं।

11 दिनों के उत्सव की परंपरा

गणेश चतुर्थी के दिन से अनंत चतुर्दशी तक का समय 11 चंद्र तिथियों में फैला होता है, जो अंग्रेजी कैलेंडर में 12 दिन बन सकता है। वर्ष 2026 में यह उत्सव 20 सितंबर से प्रारंभ होकर 1 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।

घरों में भक्त डेढ़ दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या पूरे 11 दिन गणेश जी को विराजमान रखते हैं। इस अवधि में प्रतिदिन नियमित पूजा, आरती और भोग लगाया जाता है। प्रत्येक दिन भगवान को मौसमी फल, मोदक, लड्डू और अन्य व्यंजन अर्पित किए जाते हैं।

महाराष्ट्र में यह त्योहार विशेष धूमधाम से मनाया जाता है जहां सार्वजनिक पंडालों में भव्य गणेश मूर्तियां स्थापित की जाती हैं। भक्त समूह में इकट्ठा होकर भजन-कीर्तन करते हैं और प्रतिदिन आरती में सम्मिलित होते हैं।

विसर्जन की विधि और अनंत चतुर्दशी

गणेश चतुर्थी 2026 तारीख से प्रारंभ हुए इस पर्व का समापन अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन से होता है। विसर्जन का अर्थ है भगवान को विदाई देना और अगले वर्ष फिर से आगमन का आशीर्वाद लेना।

विसर्जन से पहले अंतिम आरती की जाती है और भगवान से क्षमा याचना करते हुए पुनः आगमन का निवेदन किया जाता है। परिवार के सभी सदस्य गणेश जी को प्रणाम करके आशीर्वाद लेते हैं।

मूर्ति को नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जित किया जाता है। “गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या” (गणपति बाप्पा मोरया, अगले साल जल्दी आना) के उद्घोष के साथ भक्त मूर्ति को जल में प्रवाहित करते हैं।

पर्यावरण की रक्षा के लिए मिट्टी की मूर्तियों का उपयोग करना चाहिए। यदि नदी-तालाब उपलब्ध न हो तो घर में बड़े बर्तन या टब में जल भरकर भी विसर्जन किया जा सकता है। बाद में इस जल को पौधों में डाल दें।

गणेश चतुर्थी पर विशेष व्रत और नियम

कुछ भक्त गणेश चतुर्थी 2026 तारीख पर व्रत रखते हैं। व्रत में फलाहार या एक समय भोजन का नियम लिया जाता है। तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए।

मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। यदि भूलवश चंद्र दर्शन हो जाए तो श्रीकृष्ण की कथा सुनना या स्मरण करना चाहिए। यह परंपरा स्यमंतक मणि की कथा से जुड़ी है।

इन 11 दिनों में सत्य बोलना, दान करना और सबके प्रति दयाभाव रखना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के देवता हैं, इसलिए इस समय गलत कार्यों से दूर रहना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश चतुर्थी 2026 किस दिन है?

गणेश चतुर्थी 2026 तारीख 20 सितंबर 2026 को शनिवार के दिन पड़ रही है। यह भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि होगी।

गणेश जी की मूर्ति घर में कितने दिन रखनी चाहिए?

परंपरा के अनुसार गणेश जी को डेढ़ दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या पूरे 11 दिन घर में विराजमान रखा जा सकता है। जितने दिन रखें, नियमित पूजा अवश्य करनी चाहिए।

गणेश स्थापना के लिए कौन सी दिशा सबसे शुभ है?

गणेश जी की मूर्ति घर में पूर्व या उत्तर दिशा में स्थापित करनी चाहिए। मूर्ति का मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर रखना उत्तम रहता है ताकि भक्त पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा कर सकें।

गणेश चतुर्थी पर कौन सा भोग लगाना चाहिए?

भगवान गणेश को मोदक सबसे प्रिय हैं। इसके अतिरिक्त लड्डू, दूर्वा, गुड़, फल और मौसमी व्यंजन भी भोग के रूप में अर्पित किए जाते हैं। 21 या 11 दूर्वा की पत्तियां विशेष रूप से चढ़ाई जाती हैं।

क्या गणेश विसर्जन घर में किया जा सकता है?

हां, यदि नदी या तालाब उपलब्ध न हो तो घर में ही बड़े बर्तन या टब में स्वच्छ जल भरकर विधिवत विसर्जन किया जा सकता है। बाद में इस जल को किसी पौधे में डाल दें।

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