संतान सप्तमी व्रत 2026 सितंबर महीने के मध्य में 17 या 18 सितंबर को मनाया जाएगा। यह पवित्र व्रत संतान प्राप्ति और परिवार कल्याण के लिए विशेष महत्व रखता है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को यह व्रत करने से भगवान की कृपा से संतान सुख प्राप्त होता है।
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Toggleसंतान सप्तमी व्रत क्या है?
संतान सप्तमी एक पारंपरिक हिन्दू व्रत है जो विशेषकर निःसंतान दंपत्ति या संतान की इच्छा रखने वाले भक्त करते हैं। इस व्रत को लालिता सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन श्री राधा जी की प्रिय सखी लालिता देवी की पूजा की जाती है। परंपरा के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से भगवान की कृपा से संतान का सुख मिलता है और परिवार में खुशहाली आती है।
यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को किया जाता है। इस दिन विशेष पूजा विधि और नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है।
संतान सप्तमी व्रत 2026 की तारीख और शुभ मुहूर्त
संतान सप्तमी व्रत 2026 में 17 या 18 सितंबर को पड़ रहा है। सप्तमी तिथि की शुरुआत और समाप्ति के समय के अनुसार व्रत का दिन निर्धारित होता है। पंचांग के अनुसार जिस दिन सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि हो, उसी दिन यह व्रत रखा जाता है।
व्रत के लिए सुबह का समय विशेष शुभ माना जाता है। प्रातःकाल स्नान करके पूजा की तैयारी करनी चाहिए। पूजा के लिए सूर्योदय से लेकर मध्याह्न तक का समय उत्तम रहता है।
संतान सप्तमी व्रत की पूजा विधि
व्रत की तैयारी
संतान सप्तमी व्रत 2026 के लिए एक दिन पहले से ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें और पवित्र करें। पूजा सामग्री एकत्र करें जिसमें फूल, धूप, दीप, फल, मिठाई और नैवेद्य शामिल हैं।
व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें और संकल्प लें कि आप यह व्रत पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से कर रहे हैं।
पूजा की विधि
सबसे पहले पूजा स्थल पर भगवान गणेश की पूजा करें। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। लालिता देवी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और उनकी विधिवत पूजा करें।
पूजा में फूल, अक्षत, रोली, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें। भगवान को भोग लगाएं और आरती करें। यदि संभव हो तो विष्णु सहस्रनाम या लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें। इस दिन संतान प्राप्ति के लिए मन से प्रार्थना करें।
व्रत का पालन
संतान सप्तमी के व्रत में पूरे दिन उपवास रखा जाता है। कुछ भक्त निर्जला उपवास रखते हैं जबकि कुछ फलाहार ग्रहण करते हैं। अपनी क्षमता के अनुसार व्रत का पालन करें।
व्रत के दिन सात्विक विचार रखें और मन को शुद्ध रखें। ब्रह्मचर्य का पालन करें और क्रोध, लोभ, मोह से दूर रहें। संध्या के समय पुनः पूजा करके व्रत का पारण करें।
संतान सप्तमी व्रत का महत्व
परंपरा के अनुसार, संतान सप्तमी व्रत को अत्यंत फलदायी माना जाता है। जो दंपत्ति संतान सुख की कामना से यह व्रत पूर्ण श्रद्धा से करते हैं, उन्हें भगवान की कृपा से संतान की प्राप्ति होती है।
यह व्रत केवल संतान प्राप्ति के लिए ही नहीं, बल्कि संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि के लिए भी किया जाता है। जिनकी संतान है वे भी अपनी संतान के कल्याण के लिए यह व्रत रखते हैं।
संतान सप्तमी और लालिता देवी का संबंध
लालिता देवी श्री राधा जी की अष्ट सखियों में प्रमुख हैं। भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को लालिता सप्तमी के रूप में भी मनाया जाता है। भक्ति परंपरा में लालिता देवी को संतान सुख की देवी के रूप में भी पूजा जाता है।
इस दिन लालिता देवी की विशेष पूजा करने से भगवान श्री कृष्ण और राधा जी की कृपा प्राप्त होती है। वृंदावन और मथुरा में इस दिन विशेष उत्सव का आयोजन होता है।
व्रत के नियम और सावधानियां
संतान सप्तमी व्रत 2026 करते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है। व्रत के दिन तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहें। लहसुन, प्याज और मांसाहार का सेवन वर्जित है।
संध्या के बाद व्रत खोलते समय सात्विक भोजन ग्रहण करें। पूजा में उपयोग किए गए फूल और सामग्री को सम्मानपूर्वक विसर्जित करें। व्रत के बाद ब्राह्मण भोजन या दान करना शुभ माना जाता है।
गर्भवती महिलाओं को कठोर उपवास से बचना चाहिए और अपनी सेहत के अनुसार व्रत रखना चाहिए। स्वास्थ्य समस्या होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संतान सप्तमी व्रत 2026 कब है?
संतान सप्तमी व्रत 2026 में 17 या 18 सितंबर को पड़ रहा है। यह भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है।
संतान सप्तमी व्रत कौन कर सकता है?
यह व्रत संतान की इच्छा रखने वाले दंपत्ति, निःसंतान दंपत्ति या जो अपनी संतान के कल्याण की कामना करते हैं, वे सभी कर सकते हैं। स्त्री-पुरुष दोनों मिलकर यह व्रत कर सकते हैं।
संतान सप्तमी व्रत में क्या खाना चाहिए?
व्रत में फलाहार किया जा सकता है जिसमें फल, दूध, दही, साबूदाना और मेवे शामिल हैं। जो निर्जला व्रत रखते हैं वे संध्या के बाद ही भोजन ग्रहण करें।
संतान सप्तमी पूजा में कौन से देवता की पूजा करें?
इस दिन भगवान गणेश, भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और लालिता देवी की पूजा की जाती है। मुख्य रूप से संतान प्राप्ति के लिए लालिता देवी की आराधना करें।
क्या संतान सप्तमी और लालिता सप्तमी एक ही व्रत है?
हां, संतान सप्तमी को लालिता सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। दोनों नाम एक ही पवित्र व्रत के लिए प्रयोग किए जाते हैं।
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