दिवाली 2026 तारीख 8 नवंबर 2026 (रविवार) को है, जब भक्तगण माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करेंगे। यह पावन पर्व अमावस्या तिथि को मनाया जाता है और इस बार शुभ संयोग बन रहा है।
हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन सनातन परंपरा के अनुसार माँ लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं और स्वच्छ, प्रकाशित घरों में विराजती हैं। दिवाली 2026 तारीख पर भक्त अपने घरों को दीपों से सजाएंगे और धन-समृद्धि की कामना करेंगे।
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Toggleदिवाली 2026 तारीख और तिथि विवरण
दिवाली 2026 तारीख 8 नवंबर को पड़ रही है। कार्तिक मास की अमावस्या तिथि इस दिन रहेगी, जो लक्ष्मी पूजन के लिए सर्वाधिक शुभ मानी जाती है। परंपरा के अनुसार, यह वह रात्रि है जब भगवान श्रीराम चौदह वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे और प्रजा ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था।
दिवाली पंचदिवसीय महोत्सव का मुख्य दिवस है। इससे दो दिन पूर्व धनतेरस आती है, एक दिन पूर्व नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली, और दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा तथा भाई दूज मनाई जाती है।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल का मुहूर्त सर्वाधिक शुभ रहेगा। प्रदोष काल वह समय होता है जब सूर्यास्त के बाद अंधकार फैलने लगता है और यह अमावस्या की रात्रि में माँ लक्ष्मी की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, जब प्रदोष काल और अमावस्या तिथि एक साथ हों, तब लक्ष्मी पूजन करना अत्यंत फलदायी होता है। निशिता काल में भी पूजन किया जा सकता है। भक्तों को चाहिए कि वे अपने स्थानीय पंचांग से सटीक मुहूर्त की जानकारी लें।
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा की विधि
दिवाली 2026 तारीख पर पूजा की तैयारी दिन में ही शुरू हो जाती है। सबसे पहले घर की स्वच्छता करनी चाहिए और दीपक तैयार करने चाहिए। संध्या के समय स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल पर लाल या पीले वस्त्र बिछाकर माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। कलश स्थापना करें और उस पर नारियल रखें। गणेश जी को सबसे पहले पूजा जाता है क्योंकि वे विघ्नहर्ता हैं।
माँ लक्ष्मी को पंचोपचार से पूजें – गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। खील-बताशे, मिठाई और सूखे मेवे का भोग लगाएं। “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नमः” जैसे मंत्रों का जाप करें। लक्ष्मी जी की आरती करें और परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें।
दिवाली पर दीप जलाने का महत्व
दिवाली शब्द ‘दीपावली’ से बना है, जिसका अर्थ है दीपों की पंक्ति। इस रात्रि में घी या तेल के दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। दीपक अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं।
घर के मुख्य द्वार, आंगन, छत, खिड़कियां और तुलसी के पास दीपक अवश्य जलाएं। माना जाता है कि जिस घर में दीपों की रोशनी होती है, वहां माँ लक्ष्मी का वास होता है। दीपक दक्षिण दिशा में भी जलाएं क्योंकि यह यमराज को प्रसन्न करता है।
दिवाली पर रंगोली और सजावट
दिवाली 2026 तारीख पर घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाना शुभ परंपरा है। रंगोली माँ लक्ष्मी का स्वागत करने का माध्यम है। इसे रंगीन पाउडर, फूलों या चावल से बनाया जाता है।
रंगोली के बीच में दीपक रखें और शुभ चिह्न जैसे स्वस्तिक, कमल या पदचिह्न बनाएं। घर को आम के पत्तों की बंदनवार, फूलों की माला और रंगीन झंडियों से सजाएं। स्वच्छता और सुंदरता का यह संयोग समृद्धि को आमंत्रित करता है।
दिवाली का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
दिवाली केवल बाहरी उत्सव नहीं है, बल्कि आंतरिक प्रकाश जगाने का पर्व है। यह बुराई पर अच्छाई की, अंधकार पर प्रकाश की और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है। भगवान राम का अयोध्या आगमन, भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर का वध, और माँ लक्ष्मी का प्रकटोत्सव – सभी इस पावन दिन से जुड़े हैं।
यह पर्व परिवार के साथ मिलकर मनाया जाता है। पुराने मतभेद भुलाकर सभी एक साथ आते हैं। मिठाइयां बांटना, उपहार देना और बड़ों का आशीर्वाद लेना इस त्योहार का अभिन्न अंग है।
व्यापारी इस दिन नए बही-खाते शुरू करते हैं और माँ लक्ष्मी से वर्षभर समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। यह नवीनता और सकारात्मक शुरुआत का पर्व है।
दिवाली 2026 तारीख पर ध्यान देने योग्य बातें
दिवाली पर ध्यान रखें कि पटाखों का प्रयोग सीमित और सावधानी से करें। वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण से बचें। दीप जलाते समय सावधानी बरतें और बच्चों को आग से दूर रखें।
शुद्ध घी के दीपक जलाएं क्योंकि वे अधिक पवित्र माने जाते हैं। सफाई का विशेष ध्यान रखें और अनावश्यक सामान हटा दें। सात्विक भोजन करें और मांस-मदिरा से परहेज करें।
गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना इस दिन अत्यंत पुण्यदायी होता है। वस्त्र, भोजन या धन से जो सहायता कर सकें, अवश्य करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिवाली 2026 किस तारीख को है?
दिवाली 2026 तारीख 8 नवंबर 2026 को है। यह रविवार का दिन है और कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को यह पावन पर्व मनाया जाएगा।
लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ समय कब है?
लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल सबसे उत्तम है। यह सूर्यास्त के बाद का समय होता है जब अमावस्या की रात्रि में अंधकार फैलता है। स्थानीय पंचांग से सटीक मुहूर्त देखें।
दिवाली पर किस दिशा में दीपक जलाएं?
घर के मुख्य द्वार, सभी खिड़कियों और तुलसी के पास दीपक अवश्य जलाएं। दक्षिण दिशा में भी दीपक जलाना शुभ माना जाता है। हर कोने में प्रकाश हो तो माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
दिवाली पूजा में कौन से फूल चढ़ाएं?
माँ लक्ष्मी को कमल का फूल सबसे प्रिय है। इसके अलावा गेंदे के फूल, गुलाब और मौसमी फूल भी चढ़ाए जा सकते हैं। पीले और लाल रंग के फूल शुभ माने जाते हैं।
दिवाली पर कौन सा नैवेद्य लगाएं?
खील-बताशे, मिठाइयां जैसे लड्डू या बर्फी, सूखे मेवे और फल चढ़ाएं। घर में बनी शुद्ध मिठाई विशेष रूप से शुभ होती है। भोग लगाने के बाद ही प्रसाद ग्रहण करें।
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