दुर्गा पूजा कोलकाता गुवाहाटी में अक्टूबर 2026 के अंत में भव्य रूप से मनाया गया, जहां पूर्वी भारत के ये दोनों शहर मां दुर्गा की आराधना में रंग-बिरंगे उत्सवों से सजे रहे। यह महापर्व हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसमें मां दुर्गा के महिषासुर पर विजय की पावन कथा जीवंत हो उठती है।
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Toggleदुर्गा पूजा का महत्व
मां दुर्गा की पूजा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां के नौ रूपों की आराधना होती है। शास्त्रों के अनुसार, जब असुर महिषासुर का अत्याचार बढ़ गया, तब सभी देवताओं ने मिलकर मां दुर्गा को शक्ति प्रदान की। दस भुजाओं वाली मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया और धरती को पाप मुक्त किया।
भक्त इस पर्व में मां के विभिन्न स्वरूपों – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री – का ध्यान करते हैं। प्रत्येक दिन विशेष पूजा-अर्चना और मंत्रों के साथ मां की कृपा प्राप्त करने का अवसर है।
कोलकाता में दुर्गा पूजा की रंगीन परंपराएं
कोलकाता में दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि बंगाली संस्कृति की आत्मा है। पूरा शहर पंडालों से सज जाता है, जहां मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं स्थापित होती हैं। परंपरा के अनुसार, ये प्रतिमाएं विशेष मिट्टी से बनाई जाती हैं और कलाकार महीनों मेहनत करके इन्हें तैयार करते हैं।
शहर के विभिन्न इलाकों में सैकड़ों पंडाल सजाए जाते हैं। हर पंडाल अपनी अनोखी थीम और सजावट के लिए प्रसिद्ध होता है। भक्तों की भीड़ रात-दिन इन पंडालों में मां के दर्शन के लिए उमड़ती है। ढाक की थाप, धूप की सुगंध, और भक्तों का उत्साह – यह सब मिलकर एक दिव्य वातावरण बनाते हैं।
दुर्गा पूजा कोलकाता गुवाहाटी में मनाने की परंपरा सदियों पुरानी है, और कोलकाता में षष्ठी से दशमी तक पांच दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।
गुवाहाटी में दुर्गा पूजा की विशेषताएं
गुवाहाटी में दुर्गा पूजा असमिया संस्कृति के रंग में रंगी होती है। यहां भी मां दुर्गा के भव्य पंडाल सजाए जाते हैं, लेकिन असम की अपनी परंपराएं इसे विशिष्ट बनाती हैं। ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसे इस शहर में दुर्गा पूजा का अपना अलग आकर्षण है।
असमिया भक्त पारंपरिक पोशाकों में सजकर मां के दर्शन करने आते हैं। गुवाहाटी के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर के समीप होने से यह क्षेत्र शक्ति उपासना का विशेष केंद्र माना जाता है। यहां की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, असमिया गीत-संगीत और पारंपरिक नृत्य पूजा के आयोजनों को और भी सुंदर बना देते हैं।
पूर्वी भारत में दुर्गा पूजा की सांस्कृतिक छटा
दुर्गा पूजा कोलकाता गुवाहाटी समेत पूरे पूर्वी भारत में एक सामाजिक मिलन का अवसर भी बनता है। परिवार और मित्र एक साथ आते हैं, नए कपड़े पहनते हैं, और विशेष भोजन तैयार करते हैं।
बंगाल और असम में इस समय विशेष व्यंजन बनाए जाते हैं। लूची, आलू दम, बेगुन भाजा, पायस जैसे पकवान भोग के रूप में मां को अर्पित किए जाते हैं। महाअष्टमी के दिन पुष्पांजलि का विशेष महत्व होता है, जब हजारों भक्त एक साथ मां को फूल अर्पित करते हैं।
विजयादशमी के दिन सिंदूर खेला की परंपरा बहुत लोकप्रिय है, जिसमें महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन होता है, जो भक्तों के लिए भावुक क्षण होता है।
2026 में दुर्गा पूजा उत्सव
अक्टूबर 2026 के अंत में मनाई गई दुर्गा पूजा में कोलकाता और गुवाहाटी दोनों शहरों ने अपनी परंपराओं को जीवंत रखा। एशिया न्यूज नेटवर्क द्वारा इन रंगीन उत्सवों और परंपराओं को कवर किया गया, जिससे पूर्वी भारत की इस अद्भुत हिंदू भक्ति परंपरा को व्यापक पहचान मिली।
दोनों शहरों में भक्तों ने पूरी श्रद्धा के साथ मां दुर्गा की आराधना की। पंडालों में दिन-रात भजन-कीर्तन होते रहे, और मां की आरती की गूंज हर दिशा में फैली रही।
दुर्गा पूजा की आरती और मंत्र
दुर्गा पूजा में आरती का विशेष स्थान है। भक्त मां के सामने दीपक जलाकर आरती करते हैं और उनकी स्तुति में मंत्रों का उच्चारण करते हैं। परंपरा के अनुसार, प्रतिदिन निश्चित समय पर आरती की जाती है।
मंत्रों के माध्यम से भक्त मां से शक्ति, बुद्धि और सुरक्षा की कामना करते हैं। ढाक-ढोल की संगत में होने वाली आरती का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है। भक्त मां के चरणों में पुष्प अर्पित करते हैं और उनकी कृपा की याचना करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा पूजा कोलकाता गुवाहाटी में कितने दिन मनाई जाती है?
परंपरागत रूप से दुर्गा पूजा नौ दिनों का पर्व है, लेकिन कोलकाता और गुवाहाटी में षष्ठी से दशमी तक पांच दिन विशेष उत्सव के रूप में मनाए जाते हैं। इन पांच दिनों में पंडाल सजाए जाते हैं और भव्य आयोजन होते हैं।
दुर्गा पूजा में कौन से रंग शुभ माने जाते हैं?
दुर्गा पूजा में लाल, पीला, नारंगी और सफेद रंग विशेष शुभ माने जाते हैं। लाल रंग शक्ति का प्रतीक है और मां दुर्गा को अत्यंत प्रिय है। भक्त इन्हीं रंगों के वस्त्र पहनकर पूजा में सम्मिलित होते हैं।
कोलकाता और गुवाहाटी की दुर्गा पूजा में क्या अंतर है?
दोनों शहरों में मां दुर्गा की पूजा की जाती है, लेकिन स्थानीय संस्कृति के अनुसार परंपराएं अलग हैं। कोलकाता में बंगाली शैली के पंडाल और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, जबकि गुवाहाटी में असमिया परंपराओं का समावेश होता है। दोनों जगह भक्ति और उत्साह समान रूप से दिखता है।
दुर्गा पूजा में सिंदूर खेला क्या है?
विजयादशमी के दिन विवाहित महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं और मां दुर्गा को भी सिंदूर अर्पित करती हैं। यह परंपरा सुहाग की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए की जाती है। यह दुर्गा पूजा की सबसे रंगीन परंपराओं में से एक है।
2026 में दुर्गा पूजा कब मनाई गई?
2026 में दुर्गा पूजा अक्टूबर के अंत में मनाई गई। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास में शुक्ल पक्ष की षष्ठी से दशमी तिथि तक मनाया जाता है।
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