Durga Saptshati : दुर्गा सप्तशती (मार्कंडेय पुराण का अंश) एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली ग्रंथ है, जिसमें माँ दुर्गा के पराक्रम, महिमा और कृपा का विस्तार से वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ न केवल शक्ति साधना का एक श्रेष्ठ माध्यम है, बल्कि संकटों से रक्षा, मनोकामना पूर्ति और आध्यात्मिक उन्नति का भी मार्गदर्शक है। इस लेख में हम दुर्गा सप्तशती का इतिहास, महत्त्व, पाठ विधि और इससे मिलने वाले लाभों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
📖 संदर्भ: मार्कंडेय पुराण (अध्याय 81-93)
दुर्गा सप्तशती को चंडी पाठ या देवी महात्म्य भी कहा जाता है। यह ग्रंथ मार्कंडेय पुराण का एक महत्वपूर्ण भाग है और इसमें माँ दुर्गा के अवतारों और असुरों पर विजय की अद्भुत कथाएँ वर्णित हैं।
ग्रंथ की रचना का संदर्भ:
🔹 यह ग्रंथ ऋषि मार्कंडेय और उनके शिष्य भगुरी के संवाद के रूप में लिखा गया है।
🔹 इसमें माँ दुर्गा के तीन स्वरूपों— महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती की महिमा का वर्णन किया गया है।
🔹 इसमें असुरों के संहार की तीन प्रमुख कथाएँ वर्णित हैं—
सप्तशती के सात सौ श्लोक क्यों पढ़ने चाहिए?
दुर्गा सप्तशती के 700 श्लोकों का पाठ करने से शक्ति, समृद्धि, सुरक्षा, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है। यह न केवल आध्यात्मिक उन्नति देता है बल्कि भय, शत्रुओं, रोगों और दुष्ट शक्तियों से रक्षा करता है।
शास्त्रों में कहा गया है कि दुर्गा सप्तशती का पाठ यदि विधिपूर्वक किया जाए, तो शीघ्र फलदायी होता है।
🔹 स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
🔹 माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र के सामने दीप जलाएं।
🔹 “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जाप करें।
🔹 पाठ के लिए कुशासन या ऊन के आसन का प्रयोग करें।
1️⃣ प्रथम चरित्र (मधु-कैटभ वध): यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा, भय और अवसाद को दूर करता है।
2️⃣ मध्य चरित्र (महिषासुर वध): यह स्वास्थ्य, समृद्धि और आत्मविश्वास प्रदान करता है।
3️⃣ उत्तर चरित्र (शुंभ-निशुंभ वध): यह शत्रुनाश, विजय और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
🕉 पाठ के नियम:
✅ सप्तशती का पाठ नवरात्रि, पूर्णिमा, अमावस्या, मंगलवार और शुक्रवार को विशेष रूप से किया जाता है।
✅ पूर्ण सप्तशती का पाठ एक बार में करने से विशेष सिद्धि प्राप्त होती है।
✅ “अर्गला स्तोत्र”, “कीलक स्तोत्र” और “देवी कवच” का पाठ रक्षा और सिद्धि के लिए अनिवार्य माना जाता है।
🔹 रोग और कष्टों से मुक्ति: इस पाठ को करने से शारीरिक और मानसिक रोगों का नाश होता है।
🔹 शत्रुनाशक प्रभाव: यह शत्रुओं, नकारात्मक शक्तियों और बुरी आत्माओं से रक्षा करता है।
🔹 आर्थिक समृद्धि: माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
🔹 मानसिक शांति और आत्मविश्वास: पाठ करने से डर, चिंता और नकारात्मक विचार समाप्त होते हैं।
🔹 विवाह और संतान प्राप्ति: माँ दुर्गा की कृपा से मनचाहा जीवनसाथी और संतान सुख प्राप्त होता है।
🔹 नवरात्रि के नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से माँ दुर्गा की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।
🔹 प्रत्येक दिन एक विशेष अध्याय का पाठ करने से भिन्न-भिन्न लाभ होते हैं।
🔹 सप्तशती के साथ कन्या पूजन और हवन करने से संपूर्ण दोष समाप्त होते हैं।
दुर्गा सप्तशती केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि दिव्य शक्ति का स्रोत है। इसके पाठ से न केवल सांसारिक कष्टों का निवारण होता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है। इसे पढ़ने से माँ दुर्गा की असीम कृपा प्राप्त होती है, आत्मबल बढ़ता है और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है।
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