गणेश मूर्ति विसर्जन: मुंबई में 12,600 मूर्तियां

गणेश मूर्ति विसर्जन के समय हजारों सोने की मूर्तियाँ समुद्र में जा रही हैं, माला और भीड़ दिख रही है

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मुंबई में गणेश चतुर्थी महोत्सव के पांचवें दिन 19 सितंबर 2026 को रात 9 बजे तक 12,600 से अधिक गणेश मूर्ति विसर्जन किया गया। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि श्रद्धालु किस प्रकार पूरी आस्था और भक्ति के साथ भगवान गणेश की मूर्तियों को जल में विसर्जित करते हैं।

गणेश विसर्जन का आध्यात्मिक महत्व

गणेश मूर्ति विसर्जन केवल एक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह जीवन के शाश्वत सत्य का प्रतीक है। जिस प्रकार श्री गणेश जी की मूर्ति पानी में विलीन हो जाती है, उसी प्रकार हमें भी यह सिखाती है कि इस संसार में कुछ भी स्थायी नहीं है। भगवान गणेश हमारे घरों में पधारते हैं, हमें आशीर्वाद देते हैं, और फिर हम उन्हें विदा करते हैं – यह चक्र प्रकृति के नियम का ही एक रूप है।

विसर्जन के समय भक्तजन “गणपति बाप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या” के नारे लगाते हैं। इसका अर्थ है कि हे गणपति बाप्पा, अगले वर्ष जल्दी आना। यह नारा श्रद्धालुओं की भावना को दर्शाता है कि वे भगवान गणेश से फिर से मिलने की प्रतीक्षा करेंगे।

मुंबई में गणेश चतुर्थी परंपरा

मुंबई शहर में गणेश चतुर्थी का उत्सव अत्यंत भव्य होता है। लोकमान्य तिलक ने इस उत्सव को सार्वजनिक रूप देकर इसे एकता का प्रतीक बनाया था। मुंबई की गलियों में हर वर्ष सैकड़ों मंडल बनाए जाते हैं जहां विशाल मूर्तियां स्थापित की जाती हैं।

पांचवें दिन का गणेश मूर्ति विसर्जन विशेष महत्व रखता है। कुछ परिवार और मंडल पांच दिन की पूजा के बाद विसर्जन करते हैं, जबकि अन्य सात दिन या ग्यारह दिन तक भगवान गणेश को अपने यहां विराजमान रखते हैं। प्रत्येक परिवार अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार यह समय निर्धारित करता है।

विसर्जन प्रक्रिया में भक्ति और व्यवस्था

गणेश मूर्ति विसर्जन के दिन मुंबई की सड़कें भक्तों से भर जाती हैं। ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ मूर्तियों को समुद्र तट या नदी की ओर ले जाया जाता है। जुहू बीच, दादर चौपाटी, और गिरगांव चौपाटी जैसे स्थानों पर विसर्जन के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है।

भक्तगण पूरी श्रद्धा से भगवान गणेश की मूर्ति को जल में विसर्जित करते हैं। विसर्जन से पहले अंतिम आरती की जाती है और भगवान से प्रार्थना की जाती है कि वे अगले वर्ष पुनः पधारें।

पर्यावरण के प्रति जागरूकता

आज के समय में गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान पर्यावरण का ध्यान रखना भी आवश्यक हो गया है। अनेक भक्त मिट्टी की बनी प्राकृतिक रंगों वाली मूर्तियों का चयन करते हैं जो जल में आसानी से घुल जाती हैं।

शास्त्रों में भी प्रकृति का सम्मान करने की बात कही गई है। भगवान गणेश स्वयं प्रकृति के रक्षक हैं, इसलिए उनकी पूजा और विसर्जन भी प्रकृति के अनुकूल होना चाहिए।

घर में गणेश विसर्जन की विधि

जो श्रद्धालु घर में गणपति बाप्पा की मूर्ति स्थापित करते हैं, वे भी विधिवत विसर्जन करते हैं। छोटी मूर्तियों को बाल्टी या टब में जल भरकर विसर्जित किया जा सकता है। महत्वपूर्ण यह है कि पूरी प्रक्रिया श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हो।

विसर्जन के बाद जल को किसी पौधे में डाला जा सकता है। इस प्रकार मूर्ति की मिट्टी प्रकृति को वापस मिल जाती है और चक्र पूर्ण होता है।

गणेश महोत्सव की सामूहिक भावना

मुंबई में गणेश मूर्ति विसर्जन का आयोजन सामूहिक एकता का प्रतीक है। विभिन्न मंडलों के सदस्य मिलकर पूरे उत्सव की तैयारी करते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं, और अंत में सबके साथ मिलकर विसर्जन के लिए जाते हैं।

यह सामूहिकता भगवान गणेश की शिक्षा का ही हिस्सा है। श्री गणेश जी एकता, प्रेम और सद्भावना के देवता हैं। उनका आशीर्वाद सभी पर समान रूप से बरसता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश मूर्ति विसर्जन कब किया जाता है?

गणेश मूर्ति विसर्जन परिवार की परंपरा के अनुसार पांचवें, सातवें या ग्यारहवें दिन किया जाता है। अनंत चतुर्दशी के दिन अधिकांश मूर्तियों का विसर्जन होता है।

गणेश विसर्जन के समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?

विसर्जन के समय “गणपति बाप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या” कहा जाता है और भगवान गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना की जाती है।

क्या घर में छोटी मूर्ति का विसर्जन कर सकते हैं?

हां, घर में भी मूर्ति का विसर्जन किया जा सकता है। एक बाल्टी या टब में स्वच्छ जल भरकर श्रद्धापूर्वक विसर्जन करें और बाद में उस जल को किसी पौधे में डाल दें।

गणेश विसर्जन का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

गणेश मूर्ति विसर्जन जीवन की अस्थायीता का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि सभी रूप अंततः परमात्मा में विलीन हो जाते हैं और हमें मोह-माया से ऊपर उठना चाहिए।

पर्यावरण के अनुकूल विसर्जन कैसे करें?

मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी मूर्तियों का चयन करें। प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियों से बचें। यदि संभव हो तो घर में ही विसर्जन करें।

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