कार्तिगै दीपम तिरुवन्नामलै में इस वर्ष 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की अपेक्षा है। तमिलनाडु के मंत्री आधव अर्जुना ने यह घोषणा करते हुए बताया कि यह महाप्रकाश पर्व दक्षिण भारत के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजनों में से एक है। तिरुवन्नामलै का यह पावन पर्व Bhagwan Shiva की अग्नि-ज्योति के रूप में प्रकट होने की दिव्य स्मृति का उत्सव है।
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Toggleकार्तिगै दीपम का पावन महत्व
कार्तिगै दीपम Bhagwan Shiva के अनंत तेज और ज्योतिस्वरूप का उत्सव है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, Bhagwan Shiva ने अरुणाचलम पर्वत पर अग्नि स्तंभ के रूप में प्रकट होकर Brahma ji और Bhagwan Vishnu के मध्य हुए विवाद का समाधान किया था। तब से यह पर्वत शिव का साक्षात स्वरूप माना जाता है।
तमिल कार्तिगै माह की पूर्णिमा को यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन अरुणाचलेश्वर मंदिर से लेकर अरुणाचल पर्वत की चोटी तक दीपों की अटूट श्रृंखला जगमगा उठती है। पर्वत शिखर पर प्रज्वलित महादीप की लौ कई किलोमीटर दूर से दिखाई देती है।
तिरुवन्नामलै में कार्तिगै दीपम की विशेषता
तिरुवन्नामलै में कार्तिगै दीपम का आयोजन अत्यंत भव्य होता है। यह पर्व दस दिनों तक चलता है और प्रतिदिन अरुणाचलेश्वर मंदिर में विशेष पूजा, अभिषेक और आरती होती है। मंदिर परिसर में Bhagwan Shiva के विभिन्न रूपों की झांकियां निकाली जाती हैं।
पर्व के मुख्य दिन, पर्वत की चोटी पर स्थित दीपस्थंभ में पारंपरिक विधि से महादीप प्रज्वलित किया जाता है। इस दीपक में घी और कपूर का प्रयोग होता है। जब यह महादीप जलाया जाता है, तो पूरा नगर और आसपास का क्षेत्र आध्यात्मिक उत्साह से भर उठता है। श्रद्धालु इस दीप को देखकर मन में मनोकामना करते हैं और Bhagwan Shiva का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
गिरिप्रदक्षिणा की महिमा
कार्तिगै दीपम तिरुवन्नामलै पर्व के दौरान गिरिप्रदक्षिणा का विशेष महत्व है। अरुणाचल पर्वत की परिक्रमा लगभग 14 किलोमीटर की है। पौराणिक मान्यता है कि इस पर्वत की एक परिक्रमा से जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और Bhagwan Shiva की कृपा प्राप्त होती है।
पर्व के दिनों में लाखों श्रद्धालु नंगे पैर यह परिक्रमा पूर्ण करते हैं। मार्ग में आठ लिंगम स्थापित हैं जहां भक्त पूजा-अर्चना करते हैं। रात्रि में महादीप की रोशनी में गिरिप्रदक्षिणा का अनुभव अत्यंत दिव्य होता है। पूरा मार्ग दीपों से सजाया जाता है।
पर्व की तैयारियां और व्यवस्था
50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। मंदिर परिसर और गिरिप्रदक्षिणा मार्ग पर विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं। पीने के पानी, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाता है।
परिक्रमा मार्ग पर अस्थायी विश्राम गृह और भोजन की व्यवस्था होती है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त बसें और परिवहन सेवाएं चलाई जाती हैं। मंदिर में दर्शन के लिए विशेष कतारें बनाई जाती हैं ताकि सभी को सुगमता से दर्शन मिल सके।
पर्व का आध्यात्मिक संदेश
कार्तिगै दीपम केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आंतरिक प्रकाश की साधना है। जैसे महादीप अंधकार को दूर करता है, वैसे ही Bhagwan Shiva का ज्ञान अज्ञान के अंधकार को मिटाता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि हम अपने भीतर की दिव्य ज्योति को जगाएं।
दीप प्रज्वलन की परंपरा घर-घर में भी निभाई जाती है। तमिलनाडु में इस दिन हर घर के बाहर दीप जलाए जाते हैं। यह परंपरा परिवार में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना का प्रतीक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कार्तिगै दीपम तिरुवन्नामलै कब मनाया जाता है?
यह पर्व तमिल कार्तिगै माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो आमतौर पर नवंबर या दिसंबर में आता है। पर्व दस दिनों तक चलता है।
गिरिप्रदक्षिणा में कितना समय लगता है?
अरुणाचल पर्वत की परिक्रमा लगभग 14 किलोमीटर की है। सामान्य गति से चलते हुए इसे पूरा करने में 3 से 4 घंटे लगते हैं। कई श्रद्धालु धीरे-धीरे पूजा-अर्चना करते हुए 5-6 घंटे में पूर्ण करते हैं।
इस पर्व के दौरान कहां ठहरें?
तिरुवन्नामलै में मंदिर द्वारा संचालित विश्रामगृह, होटल और धर्मशालाएं उपलब्ध हैं। पर्व के दौरान पहले से आरक्षण करना उचित रहता है। कई भक्त आसपास के नगरों में भी ठहरते हैं।
क्या परिक्रमा के लिए कोई विशेष नियम हैं?
परिक्रमा नंगे पैर और पवित्र भाव से की जाती है। पारंपरिक रूप से दक्षिणावर्त दिशा में परिक्रमा की जाती है। मार्ग में आठ लिंगों पर पूजा करना शुभ माना जाता है।
महादीप कब प्रज्वलित किया जाता है?
मुख्य पर्व दिवस पर सायंकाल के समय, सूर्यास्त के बाद अरुणाचल पर्वत की चोटी पर स्थित दीपस्थंभ में महादीप प्रज्वलित किया जाता है। यह दीप कई दिनों तक जलता रहता है।
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