दशहरा त्योहार 2026: अच्छाई की बुराई पर विजय

दशहरा त्योहार का जश्न माता दुर्गा की मूर्ति, सिंह पर विराजमान, दीये और फूलों की माला से सजा हुआ

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दशहरा त्योहार अक्टूबर 2026 में पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, जो अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है। यह पावन पर्व भगवान श्री राम की रावण पर विजय और मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय दोनों को समर्पित है। विभिन्न राज्यों में परंपरागत उत्सव हिंदू धार्मिक महत्व को प्रदर्शित करते हैं।

दशहरा त्योहार का धार्मिक महत्व

दशहरा त्योहार का नाम संस्कृत शब्द ‘दश’ और ‘हरा’ से आया है, जिसका अर्थ है दस सिरों का नाश। यह रावण के दस सिरों का प्रतीक है, जो दस प्रकार के पापों को दर्शाते हैं। भगवान श्री राम ने लंका में रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी।

परंपरा के अनुसार, माता सीता के अपहरण के बाद भगवान श्री राम ने वानर सेना के साथ लंका पर चढ़ाई की। नौ दिनों के युद्ध के बाद दशमी के दिन रावण का वध हुआ। यही कारण है कि विजयादशमी के नाम से भी यह पर्व जाना जाता है।

मां दुर्गा से जुड़ा पावन संबंध

दशहरा त्योहार नवरात्रि के नौ दिनों की समाप्ति पर मनाया जाता है। नौ दिनों तक भक्तजन मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना करते हैं। परंपरा के अनुसार, मां दुर्गा ने नौ दिन और नौ रातों तक महिषासुर नामक दैत्य से युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध किया।

इस प्रकार दशहरा दिवस पर दो महान विजय का उत्सव एक साथ मनाया जाता है। उत्तर भारत में श्री राम की विजय की कथा अधिक प्रचलित है, जबकि पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में मां दुर्गा की विजय का महत्व अधिक है।

भारत के विभिन्न राज्यों में उत्सव

अक्टूबर 2026 में विभिन्न राज्यों में दशहरा त्योहार की अलग-अलग परंपराएं देखने को मिल रही हैं।

उत्तर भारत: दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के विशाल पुतले जलाए जाते हैं। रामलीला का आयोजन नवरात्रि के दौरान होता है और दशहरा के दिन रावण दहन के साथ समापन होता है।

पश्चिम बंगाल: यहां दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन होता है। विजयादशमी के दिन मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। भक्तजन मां से विदाई लेते हुए अगले वर्ष फिर से आने का आशीर्वाद मांगते हैं।

कर्नाटक: मैसूर में दशहरा उत्सव दस दिनों तक चलता है। मैसूर पैलेस को रोशनी से सजाया जाता है और शोभायात्रा निकाली जाती है।

गुजरात: यहां गरबा और डांडिया रास के साथ उत्सव मनाया जाता है। भक्तजन मां दुर्गा की आराधना में रात भर नृत्य करते हैं।

दशहरा के दिन की परंपराएं

दशहरा त्योहार के दिन भक्तजन प्रातःकाल स्नान करके नए वस्त्र धारण करते हैं। शमी वृक्ष की पूजा की जाती है, क्योंकि परंपरा के अनुसार पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र शमी वृक्ष पर छिपाए थे।

इस दिन नया कार्य शुरू करना शुभ माना जाता है। विद्यार्थी अपनी शिक्षा की शुरुआत करते हैं, व्यापारी नए व्यवसाय का शुभारंभ करते हैं। यह दिन विजय और सफलता का प्रतीक है।

आध्यात्मिक संदेश

दशहरा त्योहार केवल बाहरी शत्रु पर विजय का उत्सव नहीं है। यह हमारे भीतर की बुराइयों – काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार – पर विजय का संकल्प दिलाता है। रावण के दस सिर हमारी दस प्रकार की कमजोरियों का प्रतीक हैं।

भगवान श्री राम का जीवन धर्म, सत्य और कर्तव्य का मार्ग दिखाता है। मां दुर्गा की शक्ति हमें जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की प्रेरणा देती है। दशहरा हमें याद दिलाता है कि धैर्य, साहस और विश्वास के साथ हर बुराई को पराजित किया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दशहरा त्योहार क्यों मनाया जाता है?
दशहरा त्योहार भगवान श्री राम की रावण पर और मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है।

दशहरा और विजयादशमी में क्या अंतर है?
दशहरा और विजयादशमी एक ही पर्व के दो नाम हैं। विजयादशमी का अर्थ है दसवें दिन की विजय, जबकि दशहरा का अर्थ है दस सिरों का नाश।

दशहरा पर शमी वृक्ष की पूजा क्यों की जाती है?
परंपरा के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र शमी वृक्ष पर छिपाए थे। विजय प्राप्ति के बाद उन्होंने शमी वृक्ष की पूजा की थी, इसलिए यह परंपरा आज भी मानी जाती है।

दशहरा के दिन कौन से कार्य शुभ माने जाते हैं?
दशहरा पर नया कार्य शुरू करना, विद्या आरंभ करना, नए व्यवसाय की शुरुआत करना और शस्त्र पूजन करना शुभ माना जाता है।

रावण दहन का क्या महत्व है?
रावण दहन बुराई के नाश का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः धर्म और सत्य की ही विजय होती है।

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