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Toggleभीष्मस्तुति क्या है?
भीष्मस्तुति श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रथम स्कंध में वर्णित एक अत्यंत दिव्य स्तुति है। यह स्तुति भीष्म पितामह द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान करते हुए कही गई थी।
जब महाभारत युद्ध समाप्त हुआ और भीष्म पितामह बाणों की शय्या पर लेटे थे, तब उन्होंने अपने अंतिम समय में भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए जो प्रार्थना की, वही भीष्मस्तुति कहलाती है।
यह केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि अटल भक्ति, समर्पण और भगवान के प्रति निष्काम प्रेम का अद्भुत उदाहरण है।
भीष्मस्तुति की पृष्ठभूमि
महाभारत युद्ध के बाद पांडव दुःखी थे। धर्मराज युधिष्ठिर युद्ध में हुए विनाश के कारण स्वयं को दोषी मान रहे थे। तब भगवान श्रीकृष्ण उन्हें लेकर बाणों की शय्या पर स्थित भीष्म पितामह के पास गए।
भीष्म पितामह ने धर्म, राजनीति, नीति और जीवन के गूढ़ रहस्यों का उपदेश दिया। अंत में उन्होंने अपने मन को भगवान श्रीकृष्ण में एकाग्र कर उनकी स्तुति की।
भीष्मस्तुति का भाव
भीष्मस्तुति में भीष्म पितामह भगवान श्रीकृष्ण के अनेक दिव्य रूपों और लीलाओं का स्मरण करते हैं।
वे कहते हैं कि —
- वही श्रीकृष्ण अर्जुन के सारथी बने।
- वही परमात्मा होकर भी भक्तों के लिए साधारण मनुष्य जैसा व्यवहार करते हैं।
- भगवान अपने भक्तों की रक्षा हेतु हर सीमा तक चले जाते हैं।
भीष्म पितामह विशेष रूप से उस दृश्य को स्मरण करते हैं जब युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने अपना वचन तोड़ते हुए भी अर्जुन की रक्षा के लिए रथ का पहिया उठा लिया था।
यह प्रसंग दर्शाता है कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम के आगे स्वयं को भी भूल जाते हैं।

भीष्मस्तुति का महात्म्य
1. भगवान के प्रति अटूट भक्ति का आदर्श
भीष्म पितामह जीवनभर धर्म का पालन करते रहे। अंतिम समय में उनका मन केवल भगवान श्रीकृष्ण में स्थिर रहा। यह सिखाता है कि जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य ईश्वर स्मरण है।
2. मृत्यु के समय ईश्वर स्मरण का महत्व
शास्त्रों में कहा गया है कि मृत्यु के समय जिसका स्मरण होता है, वही गति प्राप्त होती है। भीष्मस्तुति इस सत्य का श्रेष्ठ उदाहरण है।
3. मन को शांति और स्थिरता प्रदान करती है
भीष्मस्तुति का नियमित पाठ मन में श्रद्धा, धैर्य और आध्यात्मिक शक्ति का संचार करता है।
4. श्रीकृष्ण भक्ति को दृढ़ करती है
इस स्तुति का श्रवण और पाठ भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और विश्वास को बढ़ाने वाला माना गया है।
भीष्मस्तुति का आध्यात्मिक संदेश
भीष्मस्तुति हमें कई महत्वपूर्ण शिक्षाएँ देती है:
- परिस्थिति कैसी भी हो, भगवान का स्मरण न छोड़ें।
- सच्ची भक्ति में अहंकार का स्थान नहीं होता।
- भगवान भक्तों के प्रेम से बंध जाते हैं।
- अंतिम समय की तैयारी पूरे जीवन की साधना से होती है।
भीष्मस्तुति पाठ के लाभ
मान्यता अनुसार, श्रद्धा से भीष्मस्तुति का पाठ करने से:
- मन में सकारात्मकता और शांति आती है।
- भक्ति और आत्मबल बढ़ता है।
- धर्म और कर्तव्य के प्रति जागरूकता आती है।
- भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम गहरा होता है।
भीष्मस्तुति केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि भक्ति, समर्पण और ईश्वर प्रेम की अमूल्य धरोहर है। बाणों की शय्या पर स्थित होकर भीष्म पितामह ने संसार को यह संदेश दिया कि जीवन के अंतिम क्षणों में भी यदि मन भगवान में स्थिर हो जाए, तो वही सच्ची सफलता है।
भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भीष्म पितामह का यह प्रेम और समर्पण आज भी भक्तों को प्रेरणा देता है।
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