अधिकमास
अधिकमास की चतुर्थी को गणेश पूजन का महत्व
सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ, व्रत, पूजा या मांगलिक कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से ही की जाती है। गणपति बप्पा विघ्नों का नाश करने वाले, बुद्धि और सिद्धि के दाता तथा भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाले देवता हैं। जब अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में चतुर्थी तिथि आती है, तब भगवान गणेश की पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया गणेश पूजन, जप, दान और व्रत अनेक गुना फल प्रदान करता है।
अधिकमास क्या है?
हिंदू पंचांग में सूर्य और चंद्रमा की गति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए लगभग हर 32 महीने 16 दिन बाद एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। यह माह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, लेकिन इस महीने में सभी देवी-देवताओं की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
अधिकमास को साधना, जप, तप, दान, कथा श्रवण और आत्मिक उन्नति का महीना माना जाता है। इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों का फल सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक माना गया है।
अधिकमास की चतुर्थी का विशेष महत्व
चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय है। प्रत्येक मास में आने वाली संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी का विशेष महत्व होता है, लेकिन जब यही चतुर्थी अधिकमास में आती है, तब इसका आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की उपासना करने से—
जीवन के विघ्न दूर होते हैं।
रुके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं।
आर्थिक बाधाएँ कम होती हैं।
शिक्षा और बुद्धि में वृद्धि होती है।
परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
मन की अशांति समाप्त होती है।
आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है।
भगवान गणेश और चतुर्थी का संबंध
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान गणेश का प्राकट्य चतुर्थी तिथि को हुआ था। इसी कारण यह तिथि गणेश जी को विशेष प्रिय मानी जाती है। गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए चतुर्थी पर उनकी पूजा करने से जीवन के कष्ट और अवरोध दूर होने लगते हैं।
अधिकमास में चतुर्थी का आगमन भक्तों को विशेष अवसर प्रदान करता है कि वे अपने जीवन के नकारात्मक प्रभावों को दूर कर भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करें।
अधिकमास की चतुर्थी पर गणेश पूजन से मिलने वाले लाभ
- विघ्नों का नाश
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। यदि किसी कार्य में बार-बार बाधा आ रही हो, तो अधिकमास की चतुर्थी पर गणेश पूजन विशेष फलदायी माना गया है।
- बुद्धि और विवेक की प्राप्ति
गणेश जी बुद्धि और ज्ञान के देवता हैं। विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लोगों तथा ज्ञान प्राप्ति के इच्छुक व्यक्तियों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।
- आर्थिक उन्नति

गणेश जी के साथ माता लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है। इसलिए इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से आर्थिक समस्याओं में राहत मिलने की मान्यता है।
- पारिवारिक सुख-शांति
चतुर्थी के दिन गणेश जी का पूजन परिवार में सौहार्द, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना गया है।
- पापों का क्षय
अधिकमास में किए गए जप और पूजन का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए इस दिन भगवान गणेश का स्मरण पापों के क्षय और पुण्य की वृद्धि का कारण बनता है।
अधिकमास की चतुर्थी पर गणेश पूजन की विधि
प्रातःकाल स्नान करें
सुबह ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय के बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान तैयार करें
पूजा स्थल को साफ करें और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
गणेश जी को प्रिय वस्तुएँ अर्पित करें
दूर्वा घास
लाल पुष्प
मोदक
लड्डू
सिंदूर
चंदन
अक्षत
मंत्र जाप करें
ॐ गं गणपतये नमः
इस मंत्र का 108 बार जप अत्यंत शुभ माना जाता है।
गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ
यदि संभव हो तो गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें। इससे विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
आरती करें
पूजन के अंत में गणेश जी की आरती कर प्रसाद वितरित करें।
अधिकमास की चतुर्थी पर क्या दान करें?
शास्त्रों में दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन निम्न वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है—
गुड़
तिल
फल
अन्न
वस्त्र
पुस्तकें
विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री
दान सदैव अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए।
अधिकमास की चतुर्थी और आध्यात्मिक साधना
अधिकमास को आत्मचिंतन और ईश्वर के निकट जाने का अवसर माना जाता है। चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की उपासना केवल सांसारिक लाभों के लिए ही नहीं, बल्कि आत्मिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण मानी गई है।
जब भक्त श्रद्धा से गणपति का स्मरण करता है, तो उसके भीतर सकारात्मक विचार, धैर्य, विवेक और आत्मविश्वास का विकास होता है। यही गुण जीवन की कठिन परिस्थितियों को सरल बनाने में सहायता करते हैं।
गणेश जी से जुड़ी प्रेरणा
भगवान गणेश का विशाल मस्तक हमें बड़ा सोचने की प्रेरणा देता है। बड़े कान हमें अधिक सुनने की शिक्षा देते हैं। छोटी आँखें एकाग्रता का संदेश देती हैं और उनका वाहन मूषक हमें यह सिखाता है कि इच्छाओं पर नियंत्रण रखना आवश्यक है।
इस प्रकार गणेश जी केवल पूजनीय देवता ही नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन के महान शिक्षक भी हैं।
अधिकमास की चतुर्थी भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत शुभ अवसर मानी जाती है। इस दिन श्रद्धा, भक्ति और विधिपूर्वक गणेश पूजन करने से विघ्नों का नाश, बुद्धि की प्राप्ति, आर्थिक उन्नति, पारिवारिक सुख और आध्यात्मिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है। अधिकमास स्वयं पुण्य और साधना का महीना माना जाता है, इसलिए इस अवधि में आने वाली चतुर्थी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
भगवान गणेश के चरणों में समर्पित होकर किया गया छोटा सा जप, पूजन या सेवा भी भक्त के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। इसलिए अधिकमास की चतुर्थी पर गणपति बप्पा का स्मरण अवश्य करें और उनके आशीर्वाद से जीवन को मंगलमय बनाएं।
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