Jai Ambe Gauri Aarti | जय अम्बे गौरी आरती

Jai Ambe Gauri Aarti | जय अम्बे गौरी आरती

माँ दुर्गा की “जय अम्बे गौरी” आरती भक्तों के हृदय में भक्ति, श्रद्धा और ऊर्जा का संचार करती है। यह आरती नवरात्रि, दुर्गा पूजा और माँ के किसी भी रूप की आराधना में विशेष रूप से गाई जाती है। इसे गाने से नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, और मानसिक शांति मिलती है। इस लेख में हम इस आरती का महत्व, इसके सुनने और गाने के लाभ, और संपूर्ण आरती प्रस्तुत कर रहे हैं।

1. जय अम्बे गौरी आरती का महत्व | Jai Ambe Gauri ka Mahatav

माँ दुर्गा को शक्ति, साहस, और करुणा की देवी माना जाता है। जब भक्त सच्चे मन से आरती गाते हैं, तो माँ उनकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं।

🔹 यह आरती माँ दुर्गा के सभी स्वरूपों की स्तुति करती है – महालक्ष्मी, महासरस्वती, और महाकाली।
🔹 नवरात्रि में इस आरती का विशेष महत्व है, क्योंकि यह माँ के नौ रूपों की उपासना को संपूर्ण बनाती है।
🔹 आरती से माँ का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में शक्ति, धैर्य और आत्मविश्वास बढ़ता है।
🔹 इसे गाने और सुनने से गृह कलह समाप्त होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

2. जय अम्बे गौरी आरती के लाभ | Jai Ambe Gauri Aarti Ke Labh

आरती गाने और सुनने से कई आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं:

नकारात्मकता और भय का नाश: माँ दुर्गा की कृपा से जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं।
संतान सुख और वैवाहिक जीवन में सुधार: माँ दुर्गा को परिवार की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है।
मन और आत्मा की शुद्धि: आरती गाने से आत्मबल और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
आर्थिक समृद्धि: माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
शत्रुओं और संकटों से मुक्ति: माँ दुर्गा की कृपा से जीवन में आने वाली समस्याएँ दूर होती हैं।

3. जय अम्बे गौरी आरती का संपूर्ण पाठ | Jai Ambe Gauri Aarti Ka Sampurna Paath

🔱 आरती जय अम्बे गौरी 🔱

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

॥ जय अम्बे गौरी ॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥

॥ जय अम्बे गौरी ॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्त पुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥

॥ जय अम्बे गौरी ॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर मुनि जन सेवत, तिनके दुखहारी ॥

॥ जय अम्बे गौरी ॥

कानन कुंडल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटि रतन जड़ित मुकुट, शोभित बल जोती ॥

॥ जय अम्बे गौरी ॥

शुंभ-निशुंभ विदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥

॥ जय अम्बे गौरी ॥

चंड-मुंड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोऊ मारे, सुर भयहीन करे ॥

॥ जय अम्बे गौरी ॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥

॥ जय अम्बे गौरी ॥

चौंसठ योगिनि गावत, नृत्य करत भैरों

बाजत ताल मृदंगा, ओर बाजत डमरू ॥

॥ जय अम्बे गौरी ॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भर्ता।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपत्ति करता ॥

॥ जय अम्बे गौरी ॥

भूख प्यास बिनसे, दुख संपत्ति बढ़े।
जो कोई तुमको ध्यावे, प्रेम सहित गावे ॥

॥ जय अम्बे गौरी ॥

4. निष्कर्ष | Conclusion

“जय अम्बे गौरी” आरती माँ दुर्गा की भक्ति का सबसे सरल और प्रभावशाली माध्यम है। इसे गाने से जीवन में शक्ति, आत्मविश्वास, समृद्धि, और शांति का संचार होता है। यह आरती न केवल हमारी आत्मा को जागृत करती है, बल्कि माँ दुर्गा के आशीर्वाद से जीवन के सभी कष्टों का निवारण करती है।

🚩 “जो भक्त माँ दुर्गा की आरती सच्चे हृदय से गाते हैं, उन्हें माँ की कृपा से असीम शांति और शक्ति प्राप्त होती है!” 🚩

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